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एक सड़क हादसा, और बिखर गया एक खुशहाल परिवार

Written by Chandra Mohan Jindal | January 09, 2017 10:58 AM | Road Safety Week

एक सड़क हादसा, और बिखर गया एक खुशहाल परिवार

जनवरी 2016 में, 22 वर्षीय जीतू और उसकी मां संतोष(45 वर्ष) खरीदारी के लिए स्कूटर पर सवार होकर बाज़ार गए, घर में शादी का माहौल था। लिहाज़ा खरीदारी लंबी चलने वाली थी। संतोष और जीतू बाज़ार से खरीदारी कर लौट ही रहे थे कि अचानक संतोष चलते स्कूटर से बीच सड़क पर गिर गई। स्कूटर चला रहे जीतू ने फ़ौरन स्कूटर की रफ़्तार कम करते हुए उसे रोका और सड़क पर पीछे की ओर भागा। अपनी मां को बीच सड़क पर लहूलुहान पड़ा देख जीतू ने अपनी मां को उठाने की कोशिश की लेकिन उसके हाथ कपकंपा रहे थे, उसने लोगों से मदद की गुहार लगाई।

संतोष ने स्कूटर पर पीछे बैठते हुए हैलमेट नहीं लगाया था, जिसकी वजह से उसे सर पर गहरी चोट लगी। कुछ लोगों ने आकर जीतू की मदद की और एंम्ब्युलेंस को बुलाया। संतोष को पास ही के अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने संतोष की हालत गंभीर बताते हुए उसे एम्स ट्रॉमा सेंटर ले जाने की सलाह दी। उस वक्त तक जीतू के परिवार के बाकी सदस्य भी अस्पताल पहुंच चुके थे। सभी ने डॉक्टरों की बात मानते हुए संतोष को एम्स ट्रॉमा ले जाने में देरी नहीं की। इस घटना को 4 घंटे बीत चुके थे और संतोष को अभी तक प्राथमिक चिकित्सा नहीं मिल पाई थी। ज़्यादा खून बह जाने की वजह से भी संतोष की हालत नाज़ुक बनी हुई थी। जैसे-तैसे संतोष को एम्स ट्रॉमा सेंटर में भर्ती कराया गया जहां डॉक्टरों ने उसी रात एक सर्जरी की।
एक के बाद एक सर्जरी के बावजूद डॉक्टर संतोष की हालत में सुधार का दावा नहीं कर पा रहे थे। और आखिरकार वो वक्त भी आ ही गया जब संतोष ही हालत बिगड़ने लगी। जीतू हादसे वाले दिन से ही खामोश था, वो उस दिन को न ही भुला पा रहा था और न ही अपनी छोटी बहन को मां की हालत के बारे में सच बता पा रहा था। डॉक्टरों ने कई दिनों तक संतोष को आईसीयू में रखा, कई सर्जरी हुई, दवाओं और दुआओं का दौर जारी रहा। लेकिन हादसे के लगभग 15 दिन बाद डॉक्टरों ने संतोष को मृत घोषित कर दिया। जीतू ने किसी तरह खुद को संभालते हुए अपने पिता को दिलासा दिया, लेकिन दोनों को ही ये समझ नहीं आ रहा था कि घर पर अपनी मां का इंतज़ार कर रही बेटी से वो क्या कहेंगे। कैसे उसे समझाएंगे…कि उसके लिए सैकड़ों सपने बुनने वाली उसकी मां आज उसे अकेला छोड़ गई है। एक सड़क हादसे ने एक खुशहाल परिवार को बिखेर कर रख दिया, उस वक़्त सभी के मन में एक ही बात थी कि, काश!

संतोष ने उस दिन हैलमेट पहना होता तो शायद आज वो हम सभी के बीच में होती।

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